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वित्त मंत्री ने कैट के श्वेत पत्र पर गौर करने का दिया आश्वासन

नई दिल्ली/पटना/13.06.19। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के श्वेत पत्र के सुझावों पर गौर करने का आश्वासन दिया। श्वेत पत्र में जीएसटी कर प्रणाली के सरलीकरण और उसे युक्ति संगत बनाने की चर्चा है। राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में कैट प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत की।

वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि कारोबारियों का राजस्व संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान है और सरकार की कोशिश है कि उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो। वित्त मंत्री ने व्यापारियों से अपने मौजूदा व्यवसाय प्रारूप को आधुनिक रूप से तैयार कर समय पर कानूनी बाध्यताओं का पालन करने का भी आग्रह किया । 

प्रवीण खंडेलवाल ने वित्तमंत्री से जीएसटी के विभिन्न कर स्लैब के तहत रखी गई वस्तुओं की समीक्षा का आग्रह किया। विभिन्न कर स्लैब में शामिल कई वस्तुएं एक दूसरे पर ओवरलैप कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे माल पर कर दर तैयार माल की कर दर से अधिक नहीं होनी चाहिए। 

ऑटो पार्ट्स एवं एल्युमीनियम बर्तन विलासिता की वस्तुएं नहीं हैं। इन्हें 28 प्रतिशत कर स्लैब से निकाला जाना चाहिए और कम टैक्स स्लैब के तहत रखना चाहिए। फॉर्म जीएसटीआर 9 और 9 सी को सरल बनाने का आग्रह किया गया। ये फॉर्म कई तरह के विवरण मांगते हैं, जो पहले नहीं थे। 

साथ ही गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को व्यापारियों को वित्त देने के लिए मुद्रा योजना में शामिल करना चाहिए। प्रत्येक राज्य और केंद्र में जीएसटी लोकपाल गठित करने का भी आग्रह किया।

कैट बिहार के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा एवं महासचिव डाॅ रमेश गांधी ने भी केंद्रीय कमेटी को सुझाव भेजा है।  फॉर्म आईटीसी 4 के उन्मूलन एवं एक्सपायरी डेट की दवाओं की वापसी को सप्लाई माना जाना चाहिए। श्वेत पत्र में कहा गया है कि कर जमा कराने की जिम्मेदारी माल बेचने वाले पर होनी चाहिए न कि माल खरीदने वाले पर। सीजीएसटी एवं एसजीएसटी  के अधिकार क्षेत्र एवं एचएसएन कोड के स्पष्टीकरण की आवश्यकता है । 
 


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