अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात हाईकोर्ट ने एक निजी कंपनी से राजस्व वसूली की कार्रवाई को एक तरह की जबरन वसूली करार दिया है। कंपनी से वसूली गयी 1.49 करोड़ रुपये की राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश कोर्ट ने स्टेट जीएसटी को दिया है।
जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और ए.सी.राव की खंडपीठ ने माइक्रोमैक्स इन्फाॅर्मेटिक्स लिमिटेड की याचिका पर यह आदेश दिया है। कोर्ट ने सात अगस्त के अपने आदेश में कहा है कि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई को बिल्कुल जबरदस्ती एवं मनमानी कहा जा सकता है। यह कर वसूलने का तरीका नहीं है। विभाग को राजस्व के लिए इतना व्यग्र नहीं होना चाहिए।
ऑडिट के बाद अहमदाबाद के राज्य कर उपायुक्त ने 30 अक्टूबर, 2018 को माइक्रोमैक्स को गुजरात मूल्य वर्धित कर अधिनियम के तहत 1,49,27,723 रुपये कर के रूप में देने का निर्देश दिया था। इसके बाद कंपनी ने इस अधिनियम की धारा 73 के तहत आकलन आदेश के खिलाफ अपील की थी।
इसी साल 25 जनवरी को राज्यकर उपायुक्त ने कंपनी के बैंक (कोटक महिंद्रा) को नोटिस भेज कर उक्त राशि जारी करने को कहा जबकि उस समय तक कंपनी को विभाग से नोटिस तक नहीं मिला था।
कंपनी ने बैंक को पांच फरवरी को लिखा कि उसकी अपील पर फैसला होने तक कर विभाग को धन जारी नहीं किया जाए। संयुक्त कर आयुक्त (अपील) ने सात फरवरी को कहा कि स्थगन आदेश के लिए कंपनी पहले विवादास्पद कर राशि का 20 प्रतिशत जमा कराये।
इसके बावजूद विभाग ने बिना अग्रिम नोटिस के बैंक को दबाव देकर 1,49,27,723 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जारी करा लिया और उसे 15 फरवरी को भुना लिया । कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों ने माना कि याचिकाकर्ता से 1,49,27,723 रुपये वसूली नहीं बनती थी क्योंकि इस मामले में एक त्रुटि हुई थी।