नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बजट 2020 की तैयारी शुरू करते हुए उद्योग और व्यापार संघों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में बदलाव के बारे में 21 नवंबर तक सुझाव मांगे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2020-21 का बजट एक फरवरी 2020 को पेश करेंगी।
वित्त मंत्रालय विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधियों और अंशधारकों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श करता है। संभवत: यह पहली बार है जबकि वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 11 नवंबर को सर्कुलर जारी कर व्यक्तिगत और कंपनियों के लिए आयकर दरों में बदलाव के साथ उत्पाद और सीमा शुल्क जैसे अप्रत्यक्ष करों में बदलाव के लिए सुझाव मांगे हैं।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि जो भी सुझाव दिये जायें, वे आर्थिक रूप से उचित होने चाहिए। सर्कुलर में कहा गया है कि आपके सुझाव और विचारों के साथ उत्पादन, मूल्य एवं बदलावों के राजस्व प्रभाव के बारे में सांख्यिकी आंकड़े भी दिए जाने चाहिए।
सीतारमण ने पांच जुलाई को अपने पहले बजट के बाद 20 सितंबर को घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर को 30 से घटाकर 22 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। इससे सभी तरह के अतिरिक्त शुल्कों को शामिल करने के बाद प्रभावी कॉरपोरेट कर की दर 25.2 प्रतिशत पर पहुंचती है।
इसके साथ ही एक अक्टूबर के बाद स्थापित होने वाली सभी विनिर्माण कंपनियों के लिये कर की दर को 15 प्रतिशत रखा गया है। इसमें अतिरिक्त कर और अधिभार सहित यह दर 17 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। साथ ही व्यक्तिगत आयकर की दर को घटाने की मांग भी उठी थी, जिससे आम आदमी के हाथ में अधिक पैसा बचे और उपभोग बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सके।