पटना। बिहार माल और सेवा कर संशोधन और एकमुश्त कर समाधान विधेयक 2019 को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दोनों विधेयकों को पेश किया।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर को अनिवार्य किया गया है। इससे नये व्यवसायियों की ठोस पहचान हो सकेगी। पहले से रजिस्टर्ड व्यवसायियों से भी चरणबद्ध तरीके से आधार नंबर प्राप्त करने के प्रावधान हैं। आधार नंबर नहीं होने की स्थिति में पहचान के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक साधन की भी व्यवस्था की गई है।
एकमुश्त कर समाधान योजना (ओटीएस) के तहत 31 दिसंबर तक पुराने मामलों का निपटारा किया जायेगा। योजना तीन माह के लिए लागू होगी। बाद में राज्य सरकार इसे तीन माह की अधिकतम अवधि के लिए बढ़ा सकेगी।
पिछली समाधान योजना में विवादित बकाया का राशि के आधार पर वर्गीकरण किया गया था एवं समाधान के लिए कर की अलग-अलग दरें निर्धारित थीं। वर्तमान समाधान योजना में अलग-अलग टैक्स स्लैब को समाप्त कर किसी भी राशि के विवादित कर बकाये को 35 प्रतिशत के भुगतान पर निपटारा किया जायेगा।
किसी करदाता ने समाधान राशि से अधिक राशि जमा कर दी है, तो कोई टैक्स रिफंड नहीं होगा। समाधान योजना लागू होने के पहले विवादित राशि के मद में कोई भुगतान किया गया है, तो करदाता को सिर्फ अंतर राशि का भुगतान करना होगा।