बेंगलुरु/पटना। बिहार सहित सभी राज्यों में जीएसटी शिकायत निवारण समितियों का गठन होगा। समिति में केंद्र एवं राज्यों के अधिकारियों के साथ उद्योग, व्यापार और कर सलाहकारों के अधिकतम 12 प्रतिनिधि होंगे। इसकी जानकारी डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने जीएसटी आईटी से जुड़े मंत्री समूह की बेंगलुरु में 13 वीं बैठक के बाद दी। मंत्री समूह की बैठक में कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई, ओडिशा के वित्तमंत्री निरंजन पुजारी एवं हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला उपस्थित थे।
बैठक में एक अप्रैल 2020 से लागू होने वाली नई कर विवरणी के प्रारूप एवं इलेक्ट्राॅनिक इनवाॅयस की भी विस्तृत समीक्षा की गयी। नई कर विवरणी में पांच करोड़ से कम टर्नओवर वालों के लिए मासिक की जगह त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने का विकल्प रहेगा। साथ ही 100 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले एक अप्रैल से अनिवार्य इलेक्ट्राॅनिक इनवाॅयस निर्गत करेंगे, जिससे उनका रिटर्न एवं ई-वे बिल स्वतः तैयार हो जायेगा। इसकी सफलता के बाद 100 करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए भी इसे शुरू किया जायेगा।
डिप्टी सीएम ने बताया कि डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले करदाताओं को आठ तरह के एकाउंटिंग साॅफ्टवेयर मुफ्त में उपलब्ध कराये जायेंगे। इससे उन्हें इनकम टैक्स एवं जीएसटी रिटर्न तैयार करना आसान हो जायेगा। इसके अलावा जिन लोगों ने नगद लेजर के गलत शीर्ष में पैसा जमा करा दिया है। वे जनवरी के तीसरे सप्ताह से उसे एक से दूसरे शीर्ष में बदल सकते हैं। इससे करीब दो लाख करदाताओं को लाभ मिलेगा।
अभी तक पूरे देश में 24 लाख 86 हजार बिना पता के फर्जी और रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले करदाताओं के निबंधन को रद्द किया गया है। साथ ही तीन लाख 47 हजार वैसे करदाताओं के ई-वे बिल को रोक दिया गया है, जिन्होंने लगातर दो महीने तक कर विवरणी दाखिल नहीं की है। ऐसे कारोबारी बाहर से कोई माल नहीं मंगा पायेंगे।