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राजस्व संग्रह में कमी बड़ी चुनौती, इस महीने हो सकती है केंद्र के साथ बैठक 

पटना। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण एवं लाॅकडाउन के कारण 2020-21 में 2 लाख 67 हजार करोड़ कम राजस्व संग्रह होने की संभावना है। राज्यों के राजस्व क्षति की भरपाई पर विचार के लिए केंद्र सरकार की ओर से इस महीने के तीसरे सप्ताह में एक बैठक हो सकती है। डिप्टी सीएम जीएसटी की तीसरी वर्षगांठ पर पटना से कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया के देश भर के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जीएसटी के लागू होने से राज्यों की सीमा से चेकपोस्ट समाप्त हो गये। देश में एक कर व्यवस्था एवं सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिली। केंद्र और राज्यों के 16 विभिन्न कर एवं 15 तरह के सेस और सरचार्ज को समाहित कर जीएसटी लागू की गई।

पहले दो वर्षों में जीएसटी की प्रगति अच्छी रही, लेकिन तीसरे वर्ष में आर्थिक मंदी के कारण राज्यों का राजस्व प्रभावित होने लगा। चौथे वर्ष में सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संकट के कारण राजस्व संग्रह में आ रही कमी है। 

चालू वर्ष के पहले दो महीने में पिछले वर्ष की तुलना में मात्र 45 फीसदी ही कर संग्रह हो सका। पूरे वर्ष में अगर पिछले वर्ष की तुलना में 65 प्रतिशत भी कर संग्रह होता है, तो राज्यों के राजस्व में 2 लाख 67 हजार करोड़ की कमी संभावित होगी।

डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्यों के राजस्व में 14 प्रतिशत से कम वृद्धि होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। केंद्र के राजस्व में भी कमी आई है। ऐसे में केंद्र व राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि लाॅकडाउन के कारण राजस्व की कमी की भरपाई कैसे की जाये। कोरोना संकट के दौरान टैक्स में वृद्धि करना भी उचित नहीं है। राज्यों ने केंद्र से कर्ज लेकर क्षतिपूर्ति का सुझाव दिया है। इस पर अगली बैठक में विचार हो सकता है।
 


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