नई दिल्ली/एजेंसी। आयकर विभाग जल्द ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के कारोबार और मूल्यह्रास से जुड़ी पूरी जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के साथ साझा करेगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस संबंध में आयकर प्रधान महानिदेशक (सिस्टम) को एमएसएमई मंत्रालय के साथ जानकारी साझा करने का निर्देश दिया है।
आयकर कानून की धारा 138 विभाग को यह अधिकार देती है कि वह करदाताओं की कोई जानकारी अथवा ब्योरा दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ साझा कर सकता है। आयकर विभाग कानून की इस धारा के तहत एमएसएमई मंत्रालय को छोटे उद्योग के आयकर रिटर्न (आईटीआर) 3, 5 और 6 में दी गई प्लांट एवं मशीनरी के मूल्यह्रास, कारोबार की बिक्री, सकल प्राप्ति और आईटीआर 4 में सकल कारोबार अथवा सकल प्राप्ति की जानकारी को साझा कर सकता है।
आयकर विभाग और एमएसएमई मंत्रालय के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान से अब उन्हीं एमएसएमई को नये नियमों के तहत दर्जा मिलेगा, जिनके आईटीआर में उनके संयंत्र एवं मशीनरी और कारोबार की तय मानकों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध होगी।
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत एमएसएमई की विभिन्न श्रेणियों के लिए नई परिभाषा तय की। संशोधित परिभाषा के मुताबिक प्लांट और मशीनरी में एक करोड़ रुपये तक निवेश और पांच करोड़ रुपये तक कारोबार करने वाली इकाई सूक्ष्म उद्यम की श्रेणी में आयेगी। इसी तरह 10 करोड़ रुपये तक निवेश और कारोबार 50 करोड़ रुपये के दायरे में हैं उन्हें लघु उद्यम कहा जायेगा। जिनका 50 करोड़ रुपये तक निवेश और सालाना कारोबार 250 करोड़ रुपये तक है उन्हें मध्यम उद्यम की श्रेणी में रखा गया है।