नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक अरब 30 करोड़ (130 करोड़) की आबादी वाले देश में केवल डेढ़ करोड़ लोग ही आयकर देते हैं। यह बहुत कम है। उन्होंने लोगों से स्वयं अवलोकन कर आयकर दाखिल करने के लिए आगे आने और राष्ट्रनिर्माण में योगदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मदद करेगा।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान मंच का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की कराधान प्रणाली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह मंच शुरू किया गया है। इस मंच में फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और करदाता चार्टर जैसे प्रमुख सुधारों को समाहित किया गया है।
उन्होंने कहा कि फेसलेस असेसमेंट और करदाता चार्टर आज से लागू हो गया है। दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से फेसलेस अपील की सुविधा भी उपलब्ध हो जायेगी। नये मंच का उद्देश्य इसे फेसलेस बनाने के अलावा करदाताओं का विश्वास बढ़ाना और उन्हें निडर बनाना भी है।
फेसलेस प्रणाली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छानबीन, नोटिस, सर्वेक्षण या मूल्यांकन के सभी मामलों में करदाता और आयकर अधिकारी के बीच सीधे संपर्क की आवश्यकता नहीं है। करदाता चार्टर एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें करदाता को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का आश्वासन दिया गया है। चार्टर करदाता की गरिमा और संवेदनशीलता को बनाये रखने का भी ध्यान रखता है। यह इस भरोसे पर आधारित है कि बिना आधार के करदाता पर संदेह नहीं किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में ईमानदार करदाताओं की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे करदाताओं का जीवन आसान बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पहले की कर प्रणाली की जटिलताओं ने इसे नया रूप देना मुश्किल बना दिया था। सरल कानून और प्रक्रियाओं का अनुपालन आसान होता है। जीएसटी ने दर्जनों करों का स्थान लिया।
नये कानूनों ने कर प्रणाली में कानूनी बोझ को कम कर दिया है। अब हाईकोर्ट में टैक्स से जुड़े मामलों को दायर करने की सीमा एक करोड़ रुपये और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने के लिए दो करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है। विवाद से विश्वास योजना जैसी पहल ने अधिकतर मामलों को अदालत से बाहर निपटाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
पिछले छह वर्षों में भारत ने कर प्रशासन में एक नया मॉडल विकसित किया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में लगभग 2.5 करोड़ की वृद्धि हुई है।