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पारदर्शी कराधान देश को सशक्त बनाने वाली व्यवस्था : हरिवंश 

पटना। पारदर्शी कराधान देश को सशक्त बनाने वाली व्यवस्था है। पारदर्शी कराधान (फेसलेस एसेसमेंट) जहां करदाताओं को आयकर विभाग के दफ्तर के चक्कर से मुक्ति दिलाएगा, वहीं आयकर अधिकारियों को भी किसी करदाता से सीधे मिलने की जरूरत नहीं होगी। उक्त बातें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहीं। वे वेब गोष्ठी पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान को संबोधित कर रहे थे। आयोजन पीआईबी, पटना ने किया था। वेबिनार को बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त वीरेंद्र सिंह ने भी संबोधित किया।    

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में ईमानदार करदाताओं की बड़ी भूमिका होती है। 130 करोड़ की आबादी में करदाताओं की संख्या महज डेढ़ करोड़ है। 10 लाख या इससे अधिक की आमदनी की घोषणा करने वाले करदाताओं की संख्या जहां 24 लाख के आसपास है, वहीं 50 लाख या इससे अधिक की आमदनी घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या मात्र 1.70 लाख ही है। 

उन्होंने कहा कि लोग विदेशों में छुट्टियां मनाने जा रहे हैं। महंगी गाड़ियां खरीद रहे हैं, महंगी शादियों का आयोजन कर रहे हैं। ये आंकड़े हमें सुधरती आर्थिक स्थिति को दर्शाती है, लेकिन वहीं हमें दूसरी ओर देखना होगा कि हमारे टैक्सपेयर कितने हैं। जो सक्षम हैं, वह जरूर कर दें। जो कर नहीं देते हैं, उन्हें समझने की जरूरत है कि वह देश का कितना नुकसान कर रहे हैं। लोग जो भी खर्च करते हैं। उसका हिसाब जरूर दें।

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त वीरेंद्र सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था में आयकर अधिकारी और करदाताओं के बीच कोई इंटरफेस नहीं होगा। संबंधित राज्य के अधिकारी को उस राज्य का कोई केस नहीं दिया जाएगा। टैक्स का एसेसमेंट तीन चरणों में होगा। एसेसिंग ऑफिसर केस को एग्जामिन करके नेशनल ई-एसेसमेंट सेंटर भेजेंगे। इसके बाद यह मामला वेरिफिकेशन यूनिट के पास जाएगा, जहां से टेक्निकल रिव्यू के लिए नेशनल एसेसमेंट सेंटर के पास वापस भेजा जाएगा। इसे एक नया एसेसिंग ऑफिसर जांच करेगा।

इस प्रक्रिया में कोई कमी होने पर करदाता को एक मौका दिया जाएगा कि वह अपनी जानकारी पेश करें। इस व्यवस्था में एक सुविधा और दी गई है कि करदाता को उसके ट्रांजैक्शन की जानकारी उसके पोर्टल पर मिल जाएगी। इस बीच अगर कोई जानकारी छूट गई है, तो करदाताओं के पास यह अवसर होगा कि वह अपने आय की जानकारी अपलोड कर सकें। 

सीए रितेश आनंद ने इस व्यवस्था की कुछ चुनौतियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि बड़ी फाइल कैसे अपलोड होंगी। यह समस्या करदाता के सामने आएगी। कई बार कानून बनते तो हैं, लेकिन उन्हें लागू होने में समय लगता है। 

पीआईबी के अपर महानिदेशक एस. के. मालवीय ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि पारदर्शी कराधान तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल की ओर ले जाने की एक पहल है। 

सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि ईमानदारी से टैक्स अदा करने वाले लोगों की शिकायत लंबे समय से रही है कि वे अपना टैक्स तो चुकता कर देते हैं, पर उन्हें परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलती। इन्हें राहत देने की कोशिश प्रधानमंत्री ने की है। इस मौके पर पवन कुमार सिन्हा, मोहम्मद इफ्तेखार आलम एवं पटना दूरदर्शन के निदेशक विजय कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
 


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