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वाणिज्य-कर विभाग ने दी ई-इनवाॅइसिंग सिस्टम की जानकारी 

पटना। जीएसटी के तहत एक अक्टूबर से ई-इनवाॅइसिंग व्यवस्था लागू की गयी है। फिलहाल जिन कंपनियों का सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें यूनिक इनवाॅइस रेफरेंस पोर्टल पर ई-रसीद का सृजन करना अनिवार्य कर दिया गया है। बीआईए परिसर में आयोजित वर्कशाॅप में वाणिज्य-कर विभाग की टीम ने ई-इनवाॅइसिंग पोर्टल की विस्तृत जानकारी दी। 

वर्कशाॅप का आयोजन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों ही मोड में किया गया ताकि अधिक से अधिक संख्या में कारोबारी इसमें शामिल हो सकें। वर्कशाॅप में वाणिज्य-कर विभाग के अपर आयुक्त मारकंडे ओझा एवं रामाधार सिंह समेत अधिकारियों की टीम थी। बीआईए की ओर से उपाध्यक्ष संजय भरतिया, महासचिव आशीष रोहतगी समेत कई सदस्य मौजूद थे।

अधिकारियों ने पोर्टल में दिये गये विभिन्न फिल्ड को भरने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था वर्तमान में उन कंपनियों पर ही लागू होगी, जिनका सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके लिए सरकार ने यूनिक इनवाॅइस रेफरेंस पोर्टल अधिसूचित किया है। इस पर ई-इनवाॅइस एवं इससे जुड़े नंबर का सृजन करना होगा जिसे आईआरएन कहा गया है। इसके बिना बिजनेस टू बिजनेस (बी टू बी) नहीं हो सकेगा। 

बाद में 100 करोड़ से ऊपर टर्नओवर वाली कंपनियों पर यह व्यवस्था लागू होगी। किस वर्ष के टर्नओवर को आधार माना जायेगा पर स्पष्ट किया गया कि पिछले तीन वर्ष अर्थात 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में से किसी भी एक वर्ष में टर्नओवर 500 करोड़ से अधिक हुआ है, तो यह व्यवस्था लागू होगी। 

वर्कशाॅप में यह भी बताया गया कि इस व्यवस्था से किस श्रेणी के कारोबार को छूट दी गयी है। जेनरेट ई-इनवाॅइस में किसी तरह की कोई गलती होती है, तो उसके लिए क्या करना होगा। कोई कंपनी इस प्रावधान का उल्लंघन करती है, तो दंड का क्या प्रावधान है ?    
 


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