नई दिल्ली। आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) की कटक पीठ के कार्यालय सह आवासीय परिसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पीठ ओडिशा के साथ पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत के लाखों करदाताओं को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगी। साथ ही क्षेत्र में सभी लंबित मामलों को निपटाने में मदद करेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश करों के आतंक से पारदर्शिता की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के दृष्टिकोण के कारण आया है। प्रौद्योगिकी की मदद से नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार किया जा रहा है। हम स्पष्ट इरादों के साथ कर प्रशासन की मानसिकता को बदल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर में कमी के साथ कर प्रक्रिया में सरलता सबसे बड़े सुधार में है। यह ईमानदार करदाताओं की गरिमा से संबंधित है ताकि उन्हें परेशानी से बचाया जा सके। आज देश में दाखिल अधिकतर रिटर्न बिना किसी आपत्ति के स्वीकार किए जाते हैं। यह देश की कर प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कर संग्रह करते समय शासन को आम लोगों के लिए असुविधा पैदा नहीं करनी चाहिए। आज का करदाता पूरी कर प्रणाली में भारी बदलाव और पारदर्शिता देख रहा है। करदाता को रिफंड के लिए अब महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता है।
पांच लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर को बड़ा लाभ बताते हुए कहा कि आयकर के नए विकल्प ने करदाताओं के जीवन को सरल बनाया है। भारत को अधिक निवेश के अनुकूल बनाने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कटौती की गई है।
उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कर की नई दर 15 प्रतिशत निर्धारित की गई है। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को भारत के पूंजी बाजार में निवेश बढ़ाने के लिए भी समाप्त किया गया है। जीएसटी ने कर के दायरे को भी कम कर दिया है।
आईटीएटी में अपील की सीमा तीन लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख और सुप्रीम कोर्ट में दो करोड़ रुपये करने से विवादों के बोझ को कम करने में आसानी हुई है। प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि आयकर अपीलीय अधिकरण भी वर्चुअल माध्यम से सुनवाई के लिए देश में अपनी पीठ को उन्नत कर रहा है।