नई दिल्ली। 75 वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को आम बजट 2021-22 में बड़ी राहत दी गई है। ऐसे वरिष्ठ नागरिक जिन्हें पेंशन और ब्याज से आमदनी होती है, उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं है। ब्याज का भुगतान करने वाला बैंक ही उनकी आय से आवश्यक कर की कटौती करके राशि ट्रांसफर कर देगा।
आयकर कार्यवाही को मौजूदा छह साल से घटाकर तीन साल कर दिया गया है। कर वंचना के गंभीर मामलों में जहां एक वर्ष में 50 लाख एवं उससे अधिक की आय को छुपाने के सबूत मिलते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित आकलन को 10 वर्ष तक दोबारा खोला जा सकता है। इसके लिए प्रधान मुख्य आयुक्त का अनुमोदन आवश्यक होगा।
छोटे आयकरदाताओं से संबंधित केस को कम करने के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक विवाद समाधान समिति बनाने का प्रस्ताव किया है। इसमें 50 लाख रुपये तक कर योग्य आय एवं 10 लाख रुपये तक की विवादित आय के साथ कोई भी व्यक्ति इस समिति तक जा सकता है।
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय फेसलेस आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की। डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स ऑडिट की सीमा पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये की गई है।
सस्ता घर खरीदने के लिए ऋण के ब्याज में 1.5 लाख रुपये तक छूट का प्रावधान 31 मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया है। देश में स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए कर छूट की समय-सीमा एक वर्ष के लिए 31 मार्च, 2022 तक बढ़ा दी गई है। कर्मचारी का योगदान देरी से जमा करने पर इसे नियोक्ता का योगदान नहीं माना जाएगा
शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल चलाने वाले छोटे चैरिटेबल ट्रस्ट पर आयकर का भार कम करने के लिए बजट में राहत की घोषणा की गई है। इसके तहत एक करोड़ रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये तक की वार्षिक लेखा प्रविष्टियों पर राहत का प्रावधान है। सूचीबद्ध प्रतिभूतियों से प्राप्त पूंजी लाभ, बैंक और डाकघरों से ब्याज का ब्योरा रिटर्न में रहेगा। वेतन आय, कर भुगतान एवं टीडीएस के विवरण भी रिटर्न में पहले से भरे होंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर की विवाद से विश्वास योजना को अच्छी तरह अपनाया गया है। 30 जनवरी, 2021 तक 1 लाख 10 हजार से अधिक करदाताओं ने इस योजना के तहत 85,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर विवाद को निपटाने का विकल्प चुना है। वर्ष 2020 में आयकर दाखिल करने वालों की संख्या 6.48 करोड़ रही, जबकि 2014 में यह संख्या 3.31 करोड़ थी।