पटना/नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 43वीं बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई। वर्चुअल माध्यम से हुई बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद भी शामिल हुए। काउंसिल की बैठक के बाद उन्होंने बताया कि विलंब से रिटर्न फाइल करने वाले छोटे करदाताओं को विलंब शुल्क में राहत दी गई है। जिनका रिटर्न पेंडिंग है, वे एमनेस्टी स्कीम का लाभ लेकर रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
विलंब शुल्क की अधिकतम सीमा में कटौती की गई है, जो अगले टैक्स पीरियड से प्रभावी होगी। यह शुल्क शून्य कर वाले व्यवसायियों के लिए अधिकतम पांच सौ रुपए, 1.5 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए अधिकतम दो हजार रुपए, 1.5 करोड़ से अधिक, लेकिन पांच करोड़ तक टर्न ओवर वाले व्यवसायियों के लिए अधिकतम पांच हजार रुपए होगा। कंपाउडिंग स्कीम वाले व्यवसायियों का कर शून्य होने पर विलंब शुल्क की अधिकतम राशि पांच सौ एवं अन्य के लिए दो हजार रुपए होगी।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में दो करोड़ रुपए से कम टर्नओवर एवं कंपाउडिंग स्कीम के कारोबारियों के लिए एनुअल रिटर्न फाइल करना ऑप्शनल कर दिया गया है। पांच करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायियों के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट से सर्टिफाई स्टेटमेंट देने की अनिवर्याता समाप्त कर दी गयी है। अब ऐसे व्यवसायियों को सेल्फ सर्टिफिकेशन के साथ रीकंसीलिएशन स्टेटमेंट देना होगा। इसके लिए सीजीएसटी एक्ट में बदलाव किया जाएगा।

डिप्टी सीएम ने बताया कि जुलाई 2017 से अप्रैल 2021 तक रिटर्न फाइल नहीं करने वाले व्यवसायियों के लिए भी विलंब शुल्क की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। यदि रिटर्न एक जून 2021 से 31 अगस्त 2021 तक दाखिल हो जाती है, तो शून्य कर वाले व्यवसायियों के लिए अधिकतम विलंब शुल्क 500 रुपए जबकि अन्य मामले में अधिकतम एक हजार रुपए विलंब शुल्क होगा।
जीएसटी काउंसिल की वर्चुअल बैठक के दौरान मुख्य सचिवालय सभागार से वाणिज्य कर विभाग की सचिव सह राज्यकर आयुक्त डाॅ प्रतिमा, विशेष सचिव अरुण कुमार मिश्रा, विशेष आयुक्त संजय कुमार मावंडिया एवं संयुक्त आयुक्त विनोद झा मौजूद थे।