पटना। बिहार माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक 2021 विधानसभा से पारित हो गया। डिप्टी सीएम सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने इसे सदन में पेश किया। जीएसटी काउंसिल की अनुशंसा पर संसद ने इस वर्ष केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम में संशोधन किया है। इस कारण बिहार माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक के माध्यम से बिहार जीएसटी कानून को भी संशोधित किया गया है।
1. इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के उपयोग में गड़गड़ी पर रोक के लिए धारा 16 में संशोधन किया गया है। इसके बिना क्रेडिट लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
2. वर्तमान में कारोबारियों को अपनी खाता बही को इनकम टैक्स के साथ जीएसटी में भी ऑडिट कराना पड़ता है। ऑडिट की दोहरी मार से बचाव के लिए जीएसटी एक्ट की धारा 35 एवं 44 में संशोधन किया गया है।
3. टैक्स जमा करने में विलंब होने पर कारोबारियों को ब्याज देना होता है। वर्तमान में यह व्यवसायियों को मिलने वाली क्रेडिट राशि पर भी लग जाता है। इस राशि पर ब्याज नहीं लगाए जाने के लिए एक जुलाई, 2017 से धारा 50 में संशोधन किया गया है।
4. पोर्टल पर बीजक वार बिक्री अपलोड करने के बावजूद इस पर टैक्स नहीं देने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए धारा 75 में संशोधन किया गया है।
5. किसी आदेश के विरुद्ध अपील दायर करने पर अग्रिम राशि जमा करने के प्रावधान के लिए धारा 107 में संशोधन किया गया है।
6. बिना कागजात के माल के परिवहन पर रोकथाम के लिए टैक्स लगाने की वर्तमान प्रक्रिया में कई कठिनाइयां आ रही थीं। इसके लिए धारा 129 में संशोधन किया गया है।
7. अधिनियम के अंतर्गत आयुक्त को सशक्त बनाने के लिए धारा 151 एवं 152 में संशोधन किया गया है। इन धाराओं का उपयोग सूचना एकत्रित करने के लिए किया जाएगा।
8. क्लब जैसे संस्थानों को अपने सदस्यों को मूल्य के बदले दिए जाने वाले माल एवं सेवाओं को कानून के तहत सप्लाई माने जाने के लिए अधिनियम की धारा 7 में संशोधन किया गया है।