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पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने पर नहीं बनी सहमति 

नई दिल्ली । जीएसटी काउंसिल की बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमति नहीं बनी। अधिकतर राज्यों ने कहा कि फिलहाल ऐसा करना उचित नहीं है। केरल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद काउंसिल ने पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाने पर चर्चा की थी। 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 17 सितंबर को लखनऊ में जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में राज्यों के वित्तमंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। काउंसिल की सिफारिशें निम्न हैं- 

--  स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवन रक्षक दवाएं जोलजेन्स्मा और विल्टेप्सो के आयात पर जीएसटी से छूट दी गई है। अभी इन दवाओं पर 12 प्रतिशत आईजीएसटी लग रहा है। 

--  कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं पर जीएसटी की मौजूदा रियायती दरों को 31 दिसंबर, 2021 तक बढाया गया है।

--  फार्मास्युटिकल विभाग से अनुशंसित सात अन्य दवाओं पर जीएसटी दर 31 दिसंबर 2021 तक 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है।

--  कैंसर के इलाज के लिए कीट्रूडा दवा पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।

--  दिव्यांग लोगों के उपयोग में आने वाले वाहनों के लिए रेट्रो फिटमेंट किट पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

--  आईसीडीएस जैसी योजनाओं के लिए फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है।

--  ईंट भट्टों को 20 लाख रुपये की थ्रेशहोल्ड लिमिट के साथ विशेष कंपोजिशन स्कीम के तहत लाया जाएगा। यह एक अप्रैल 2022 से प्रभावी होगा। योजना के तहत आईटीसी के बिना ईंट पर छह प्रतिशत अन्यथा आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू होगा।

--  सुगंधित मीठी सुपारी, फ्लेवर्ड एवं कोटेड इलायची पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा।

--  फ्रूट ड्रिंक के कार्बाेनेटेड फ्रूट बेवरेज और फ्रूट जूस के साथ कार्बाेनेटेड बेवरेज पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 12 प्रतिशत उपकर लगेगा। 

--  ताजे फल, सूखे मेवे और नट्स के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। इन पर जीएसटी दर क्रमश: शून्य, 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत लागू होगी।

--  सभी फार्मास्युटिकल वस्तुओं पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत ही है। 

-- सीजीएसटी नियमों के तहत फॉर्म जीएसटी आईटीसी 4 दाखिल करने में छूट दी गई है।  पिछले वित्त वर्ष में पांच करोड़ रुपए से अधिक के वार्षिक कारोबार वाले करदाताओं को छह महीने में एक बार आईटीसी 4 दाखिल करना होगा।

--  पिछले वित्त वर्ष में पांच करोड़ रुपए से कम वार्षिक कारोबार वाले करदाताओं को सालाना आईटीसी 4 दाखिल करना होगा।
 


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