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बिना ब्रांड वाले फूड प्रोडक्ट को जीएसटी से मुक्त रखने की अपील

पटना। बिना ब्रांड वाले फूड प्रोडक्ट को जीएसटी से मुक्त रखने की मांग बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने केंद्रीय वित्त मंत्री एवं राज्य के डिप्टी सीएम सह वाणिज्य-कर मंत्री से की है।

चैंबर का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में इन वस्तुओं को टैक्स के दायरे में नहीं लाना चाहिए। बिना ब्रांड वाले फूड प्रोडक्ट पर पांच प्रतिशत टैक्स का प्रस्ताव है। इन्हें कर के दायरे में लाने से पहले व्यवसायियों से विमर्श जरूरी है।

चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बताया कि सरकार का बिना ब्रांड वाले खाने-पीने के सामान को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इस पर मंत्रियों के समूह की बैठक में आपसी सहमति भी बन चुकी है। इसे चंडीगढ़ में 28 और 29 जून को होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा।

खाने-पीने का सामान एवं अनाज आवश्यक वस्तु में आता है। इसकी जरूरत हर व्यक्ति को होती है। पहले की कर प्रणाली में भी इन वस्तुओं को करमुक्त श्रेणी में रखा गया था। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर यह अतिरिक्त भार होगा।  

चैंबर अध्यक्ष का कहना है कि जहां एक ओर प्रतिमाह जीएसटी राजस्व संग्रह में वृद्धि हो रही है, वहीं खाने-पीने के सामान पर जीएसटी लगाने का प्रस्ताव उपयुक्त प्रतीत नहीं होता है। यह सरकार की सोच सबका साथ सबका विकास के प्रतिकूल है। वर्तमान परिस्थिति में यह जरूरी है कि जीएसटी कर कानून एवं नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जाए।

 

 


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