पटना। एक जुलाई, 2022 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के पांच वर्ष पूरे हो गए। इस दौरान बिहार के राजस्व संग्रह में 91.37 फीसदी की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में वाणिज्य-कर विभाग का राजस्व संग्रहण 18,751 करोड़ था। यह वर्ष 2021-22 में बढ़कर 35,884 करोड़ हो गया है। डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने यह जानकारी जीएसटी दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में दी।
उन्होंने वाणिज्य-कर विभाग के सभी अधिकारियों को जीएसटी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीएसटी प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ा है और कर आधार में वृद्धि हुई है। जीएसटी प्रणाली लागू होने के समय टैक्सपेयर बेस मात्र 1.72 लाख था। यह बढ़कर छह लाख से अधिक हो चुका है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि कर अधिकारियों ने सरकार की प्रतिबद्धता को महसूस करते हुए अपनी कार्यशैली में बदलाव लाया है। इससे राज्य को कर संग्रहण में लाभ मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिहार का बजट 2,18,000 करोड़ का था। यह वर्तमान वित्तीय वर्ष में बढ़कर 2,37,000 करोड़ हो गया है।

उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बिहार उन सर्वाेच्च पांच राज्यों में शामिल हो गया है, जिसने विगत वित्तीय वर्ष में दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विकास योजनाओं पर खर्च किया है। यह सब कुछ कोरोना की वैश्विक चुनौतियों के बीच हासिल किया गया है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि जीएसटी प्रणाली में आगे और भी सुधार के लिए मंत्रियों के कई समूह बनाए गए हैं। रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए मंत्रियों के समूह में बिहार के उपमुख्यमंत्री को संयोजक बनाया गया है। इसके अलावा जीएसटी में कर दरों को और अधिक युक्तिसंगत बनाने एवं इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों की समीक्षा के लिए गठित मंत्रियों के समूह में भी बिहार के उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। इसका भी लाभ राज्य को मिल रहा है।
राज्यकर आयुक्त सह सचिव डॉ प्रतिमा ने भी अपने विचारों को रखा। इस मौके पर वरीय अधिकारी अरुण मिश्रा, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अमित मुखर्जी, बीआईए के उपाध्यक्ष अरविंद सिंह, विभाग के अधिकारी, व्यवसायी एवं उद्यमी मौजूद रहेे।