नई दिल्ली। आयकर रिटर्न फाइल करने में नई कर व्यवस्था चुनने वालों को अब सात लाख तक की सालाना आय पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा। वेतनभोगी वर्ग के लिए 50 हजार एवं पेंशनधारी के लिए 15,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन भी शामिल किया गया है।
नई कर व्यवस्था में टैक्स स्लैब की संख्या कम कर पांच एवं टैक्स छूट सीमा बढ़ाकर तीन लाख की गई है। पुरानी कर व्यवस्था के टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहां टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख ही है।
नई कर व्यवस्था की दरें : तीन लाख तक की आय पर शून्य, तीन से छह लाख पर पांच प्रतिशत, छह से नौ लाख पर दस प्रतिशत, नौ से 12 लाख पर 15 प्रतिशत, 12 से 15 लाख पर 20 प्रतिशत, 15 लाख से अधिक पर 30 प्रतिशत।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने संसद में पेश केंद्रीय बजट 2023-24 में इसका प्रस्ताव रखा। बजट में नई आयकर व्यवस्था को डिफॉल्ट रखा गया है। इससे रिटर्न फाइल करने वालों के पास पुरानी कर व्यवस्था अपनाने का भी विकल्प रहेगा।
बजट में नई कर व्यवस्था में दो करोड़ रुपए से अधिक की आय पर सरचार्ज 37 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। निजी कंपनियों में कार्यरत कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली लीव इनकेशमेंट सीमा तीन लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए की गई है।
क्या है नई कर व्यवस्था : यह व्यवस्था वर्ष 2020 में लागू की गई थी। अभी आयकर के सेक्शन 87 (ए) के तहत पुरानी तथा नई कर व्यवस्था में पांच लाख तक की आय पर कोई कर नहीं है। वर्तमान में नई कर व्यवस्था चुनने वालों को स्टैंडर्ड डिडक्शन, होमलोन एवं टैक्स छूट से जुड़ी किसी योजना में निवेश (80 सी, 80 सीसीडी, 80 डी ) का लाभ नहीं मिलता है।
नई कर व्यवस्था शुरू करने का मकसद वैसे लोगों को राहत देनी है, जो कम बचत के कारण टैक्स छूट स्कीम से जुड़ी किसी योजना में निवेश का लाभ नहीं ले पाते हैं।