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अंतरिम बजट : प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में कोई बदलाव नहीं

अंतरिम बजट 2024-25 में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। संसद में अंतरिम बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करों की मौजूदा दरों को बरकरार रखने का प्रस्ताव दिया। 

उन्होंने कहा कि जुलाई में हमारी सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी। इसमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का विस्तृत रोड मैप पेश किया जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने स्टार्टअप और पेंशन फंड के निवेश एवं आईएफएससी यूनिट की कुछ आय पर टैक्स छूट 31 मार्च 2025 तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। 

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छोटी-छोटी प्रत्यक्ष कर मांग (टैक्स डिमांड) बही खातों में लंबित हैं। इनमें कई वर्ष 1962 से पहले की हैं। करदाताओं की सुविधा के लिए वित्तीय वर्ष 2009-10 तक 25 हजार रुपये तक के बकाया टैक्स डिमांड को वापस लिया जाएगा। 

साथ ही वित्त वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक दस हजार रुपये तक के बकाया टैक्स डिमांड को भी वापस लिया जाएगा। इससे एक करोड़ करदाताओं को फायदा होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कर व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने के लिए किये गये प्रयासों की भी जानकारी दी। 

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में जहां 2.2 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त थी, वहीं अब सात लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। 

खुदरा व्यवसायों के लिए कारोबार सीमा दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ एवं पेशेवरों के लिए अनुमानित कराधान सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये की गई है।

वर्तमान घरेलू कंपनियों के लिए आयकर दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत एवं विनिर्माण क्षेत्र की नई कंपनियों के लिए आयकर दर 15 प्रतिशत रखी गई है। 

कर रिटर्न प्रोसेस करने की औसत समय सीमा 93 दिन से घटकर दस दिन हो गई है।


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