सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को अवमानना का नोटिस जारी किया है। आयुर्वेदिक दवा के भ्रामक विज्ञापनों पर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर इसे जारी किया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।
शीर्ष अदालत ने कंपनी को ऐसे भ्रामक विज्ञापन जारी नहीं करने का निर्देश दिया था। पतंजलि आयुर्वेद ने इसे नजरअंदाज किया। इस पर कोर्ट ने कंपनी और एमडी आचार्य बालकृष्ण को नोटिस जारी किया है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पतंजलि ने जहां कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथ के खिलाफ गलत प्रचार किया, वहीं आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का झूठा दावा भी किया।
जस्टिस हिमा कोहली और ए. अमानुल्लाह की पीठ ने चेतावनी दी है कि पतंजलि आयुर्वेद की ओर से झूठे और भ्रामक विज्ञापन तुरंत बंद होने चाहिए। खास तरह की बीमारियों को ठीक करने के झूठे दावे करने वाले प्रत्येक प्रोडक्ट के लिए एक करोड़ रुपये तक के जुर्माना की संभावना भी जाहिर की।