बिहार की अर्थव्यवस्था वर्तमान मूल्य पर 2023-24 में बढ़कर 8.54 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई। यह आंकड़ा आधार वर्ष 2011-12 के 2.47 लाख करोड़ से 3.5 गुना अधिक है। वर्ष 2023-24 के लिए बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्तमान मूल्य पर 8,54,429 करोड़ रुपए और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,64,540 करोड़ रुपए है।
डिप्टी सीएम सह वित्तमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2024-25 पेश कर यह जानकारी दी। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के 19वें संस्करण की रिपोर्ट बिहार लोक वित्त एवं नीति संस्थान (बीआइपीएफपी) ने तैयार की है। रिपोर्ट में 14 चैप्टर हैं। इनमें बिहार की अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडेड (जीएसवीए) में तृतीयक क्षेत्र का 58.6 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 21.5 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र का 19.9 प्रतिशत योगदान है।
जीएसडीपी में वर्तमान मूल्य पर 14.5 प्रतिशत और स्थिर मूल्य पर 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2023-24 में पिछले वर्ष की तुलना में प्रति व्यक्ति जीएसडीपी वर्तमान मूल्य पर 12.8 प्रतिशत बढ़कर 66,828 रुपए और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 7.6 प्रतिशत बढ़कर 36,333 रुपए पहुंच गया।
राजकीय वित्तव्यवस्था : वित्तवर्ष 2023-24 में राज्य सरकार का कुल व्यय 2,52,082 करोड़ रुपए था। कुल व्यय में योजना व्यय 1,01,835 करोड़ और स्थापना एवं समर्पित व्यय 1,50,247 करोड़ रुपए था। कर राजस्व 1,61,965 करोड़ रुपए पहुंच गया।
कृषि : धान के उत्पादन में 21 प्रतिशत, गेहूं में 10.7 प्रतिशत और मक्का के उत्पादन में 66.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में मछली, अंडों और दूध का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। मछली उत्पादन 27.3 प्रतिशत, अंडों का उत्पादन 85.7 प्रतिशत और दूध का उत्पादन 45 प्रतिशत बढ़ा है।
उद्यम क्षेत्र : 2022-23 से सितंबर 2024 तक उद्योगों में कुल निवेश 3.5 गुना बढ़ा है। सूक्ष्म उद्यम में छह गुना अधिक निवेश हुआ है। रोजगार सृजन 2.6 गुना बढ़ा है।