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मंदार पर्वत, मुंडेश्वरी धाम और सुल्तानगंज क्षेत्रों का होगा वैज्ञानिक सर्वे 

बिहार की हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार व्यापक अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्रमुख पुरातात्विक स्थल सुल्तानगंज, मंदार, मुंडेश्वरी धाम, बोधगया और विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। 

सरकार का उद्देश्य इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री से देश के वरिष्ठ पुरातत्वविद एवं विशेषज्ञों ने मुलाकात की। उन्होंने कैमूर जिला स्थित मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्स्थापन और संरक्षण किया जा सकता है। इससे यह संपूर्ण क्षेत्र भारतीय पुरातात्विक धरोहर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा।

प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ केके मोहम्मद (राम जन्मभूमि उत्खनन दल के सदस्य), डॉ रजत सान्याल, प्रोफेसर अनिल कुमार, एएसआई पटना के डॉ हरिओम शर्मा थे। साथ में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और कला-संस्कृति एवं भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार भी मौजूद रहे।
 


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