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गंगा जल संधि में बिहार को मिलनी चाहिए प्राथमिकता

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के समग्र विकास, कृषि के विस्तार और औद्योगिक प्रगति के लिए पर्याप्त जल जरूरी है। गंगा जल संधि में बिहार के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार का आयोजन जल संसाधन विभाग ने किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की नदी और आबादी को राज्य की कमजोरी नहीं बल्कि सबसे बड़ी ताकत बनाना है। यदि हम अपनी कमजोरियों को बदलने में सफल रहे, तो बिहार समृद्ध राज्य जरूर बनेगा। 

राज्य सरकार ने गाद प्रबंधन (Silt Management) को लेकर नीति बनायी है। गंगा एवं अन्य नदियों के गाद का वैज्ञानिक तरीके से निष्कासन और उपयोग होगा। गाद एवं मिट्टी का आम लोगों के उपयोग, सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होगा। इसके लिए बिहार सरकार और NHAI के बीच समझौता होगा। राष्ट्रीय स्तर पर भी गाद प्रबंधन के लिए एक ठोस नीति बनाने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने गंगा तटबंधों के निर्माण एवं मजबूती पर विशेष जोर देते हुए कहा कि नदी के प्रवाह को वैज्ञानिक तरीके से समझना और उसके अनुरूप कार्य करना जरूरी है। संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों को गंगा का हवाई सर्वेक्षण कराया जाएगा ताकि वे नदी की वास्तविक स्थिति, प्रवाह और गाद जमाव का प्रत्यक्ष आकलन कर प्रभावी सुझाव दे सकें। 

बिहार की नदियां राज्य के लिए अपार संभावनाओं का स्रोत हैं। इनके जल और गाद का समुचित प्रबंधन कर कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों के लिए रोजगार एवं नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

कार्यक्रम को डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव एवं सांसद संजय कुमार झा ने भी संबोधित किया। 
 


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