बेतिया राज की बिहार और उत्तरप्रदेश में फैली 15358 एकड़ जमीन बिहार सरकार के अधीन हो गई है । इसके लिए बिहार विधानमंडल में बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाले विधेयक को मंजूरी दी गई। सभी जमीन की कीमत लगभग 8000 करोड़ रुपये है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने सदन में विधेयक को पेश किया। उन्होंने बताया कि बिहार के मोतिहारी, बेतिया, सारण, सीवान, गोपालगंज और पटना जिले में बेतिया राज की 15215 एकड़ जमीन है।
उत्तरप्रदेश में बेतिया राज की 143 एकड़ जमीन है। यह संपत्ति गोरखपुर, वाराणसी, कुशीनगर, मिर्जापुर, महाराजगंज, फैजाबाद, इलाहाबाद और बस्ती जिलों में है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि संपत्तियों की देखरेख ठीक से नहीं होने के कारण जमीन पर माफियाओं का कब्जा शुरू हो गया है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को विधेयक लाना पड़ा।
अब संबंधित जिला प्रशासन को अतिक्रमण के मामलों को निबटाने में काफी सहूलियत होगी। मुख्यालय स्तर पर इसकी निगरानी का जिम्मा राजस्व पर्षद ( बोर्ड ऑफ रेवेन्यू) को दिया गया है।
सभी संपत्ति बिहार सरकार के पास आ जाने के बाद लोक कल्याणकारी कार्यों में इसका उपयोग होगा। वहां हॉस्पिटल, कॉलेज एवं अन्य संस्थान खोले जाएंगे।
बेतिया राज का इतिहास : बेतिया राजवंश की जानकारी मुगल शासकों के समय से मिलती है। इस राजवंश के अंतिम राजा हरेंद्र किशोर सिंह थे। उनकी दोनों पत्नियों से कोई संतान नहीं थी। संपत्ति का प्रबंधन ठीक से नहीं होने के कारण ब्रिटिश काल में बेतिया राज की जमीन बिहार के कोर्ट ऑफ वार्ड्स को सौंप दी गई।
आजादी के बाद सारी जमीन बिहार सरकार के अधीन आ गई, लेकिन कोई कानून नहीं रहने के कारण जमीन पर अतिक्रमण शुरू हो गया है ।