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Bihar : जमीन के अधिक सर्किल रेट से निर्माण क्षेत्र प्रभावित

बिहार में जमीन के सर्किल रेट में भारी वृद्धि के प्रस्ताव से रियल एस्टेट, निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सर्किल रेट वास्तविक बाजार मूल्य से अधिक होने से संपत्ति के हस्तांतरण में बाधा आ रही है। इससे बाजार की गतिविधियां प्रभावित होने के साथ राजस्व पर भी असर हो रहा है। 

इन समस्याओं को लेकर बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधिमंडल निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव से मिला। सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष एन.के.ठाकुर, शहरी विकास उपसमिति के चेयरमैन राजेश चौधरी थे।

बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सुझाव दिया कि भूमि का मूल्यांकन पिछले 2-3 वर्षों के उच्चतम विक्रय मूल्य के औसत अथवा मुद्रास्फीति के आधार पर होना चाहिए। सर्किल रेट में वृद्धि प्रत्येक वर्ष की जगह तीन वर्षों में एक बार अधिकतम 5 प्रतिशत की दर से हो। इससे दरों में तर्कसंगत वृद्धि होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। 

फ्लैटों के मूल्यांकन को लेकर चैंबर ने वर्तमान प्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निर्माण लागत में क्षेत्रवार अंतर पहले से ही भूमि मूल्य को समाहित करता है। ऐसे में भूमि का अनुपातिक मूल्य अलग से जोड़ना दोहरी गणना है। चैंबर ने सुझाव दिया कि फ्लैटों की दर भूमि मूल्य सहित निर्धारित की जाए और पूरे राज्य में एक समान दर लागू हो। 

लीज डीड के पंजीकरण शुल्क को सरल एवं युक्तिसंगत बनाने, दस्तावेज सुधार की समय-सीमा समाप्त करने तथा पावर ऑफ अटॉर्नी में रक्त संबंधियों की परिभाषा को स्पष्ट एवं व्यापक बनाने का भी सुझाव दिया। लीज डीड के पंजीकरण शुल्क की अधिकतम सीमा उत्तर प्रदेश की तरह निर्धारित करने पर चर्चा हुई। 
 


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