नई दिल्ली/एजेंसी। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक के मामले में बड़ा फैसला दिया है। यूनिटेक मैनेजमेंट पर निवेशकों के धन की हेराफेरी और कुप्रबंधन का आरोप है। ट्रिब्यूनल ने सरकार को कंपनी के 10 निदेशकों की नियुक्ति करने की अनुमति दे दी। जस्टिस एम.एम. कुमार की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय बेंच ने सरकार को 20 दिसंबर तक निदेशक के तौर पर नियुक्त किए जाने वाले 10 लोगों के नाम देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन होनी है।
यूनिटेक मैनेजमेंट पर निवेशकों के धन की हेराफेरी और कुप्रबंधन का आरोप है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी का प्रबंधन संभालने के लिए एनसीएलटी का रुख किया था। ट्रिब्यूनल ने यूनिटेक को जवाब देने के लिए नोटिस भी जारी किया है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि यूनिटेक के नए निदेशक उच्चतम न्यायालय के सभी आदेशों का पालन करेंगे। एनसीएलटी ने यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और भाई अजय चंद्रा को जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यूनिटेक ने कहा था कि सरकार ने कंपनी के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई के बारे में उच्चतम न्यायालय को सूचित नहीं किया है। इससे पहले यूनिटेक को पहला झटका उस समय लगा जब ट्रिब्यूनल ने उसके 10 निदेशकों को निलंबित कर दिया।
इसी साल अप्रैल में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा को निवेशकों से पैसे लेने के बावजूद प्रोजेक्ट्स पर काम नहीं करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। करीब 70 प्रोजेक्ट्स में 16,000 इकाइयों का आवंटन नहीं करने के साथ ही यूनिटेक पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है।