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नये बिल्डिंग बाईलॉज को शीघ्र मिलेगी स्वीकृति

पटना । बिहार की नई बिल्डिंग बाईलॉज को इस माह के अंत तक कैबिनेट की स्वीकृति मिल जायेगी। ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम से भवन निर्माण के लिए नक्शा व अन्य विभागों की स्वीकृति भी एक समय सीमा में मिलेगी। निर्माण क्षेत्र का देश की जीडीपी में करीब 8 फीसदी योगदान है। इसलिए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। उक्त बातें डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहीं। वह होटल लेमन ट्री में काॅन्फेडरेशन आॅफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (क्रेडाई) की बैठक को संबोधित कर रहे थे। 

नक्शा शीघ्र होगा पास : नई बिल्डिंग बाईलॉज में 300 वर्गमीटर जमीन पर 10 मीटर ऊंचाई में बनने वाले मकान के नक्शे को तत्काल स्वीकृति मिलेगी। आबादी घनत्व को देखते हुए 30 फुट पुरानी और 40 फुट नई सड़कों पर बनने वाले मकानों की ऊंचाई पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। 

15 फीसदी अतिरिक्त एफएआर : 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने के लिए किफायती आवास एवं मलीन बस्ती नीति में संशोधन कर बिल्डर को 15 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर (फर्श-क्षेत्र अनुपात) देने का सरकार ने निर्णय लिया है। 

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम : केंद्र सरकार क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम के तहत पहली बार मकान बनाने वालों को 2.5 लाख तक अनुदान देगी। पहले के 1291 वर्गफुट कारपेट एरिया की जगह 2152 वर्गफुट के फ्लैट खरीदने वालों को भी 2.5 लाख तक अनुदान या 4 फीसदी ब्याज छूट मिलेगी। 

आश्रय निधि के तहत राहत : इसके अंतर्गत भी बिल्डर को बड़ी राहत दी गयी है। बिल्डरों को 500, 2000 और 4000 वर्गमीटर जमीन के लिए पहले के 10 लाख, 40 लाख व 80 लाख की जगह अब 1, 4 और 8 लाख रुपये जमा करना होगा। 

लेबर सेस : सरकार निर्माण कंपनियों से लेबर सेस वसूलने की प्रक्रिया को सरल करेगी। फिलहाल सरकार के पास 900 करोड़ का फंड है। सरकार इस राशि का पूरा उपयोग श्रमिक हित में करना चाहती है। डेवलपर्स को श्रमिकों के लिए बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।  

जीएसटी : निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले अधिकतर सामान पर टैक्स पहले की तुलना में जीएसटी में काफी कम हो गया है। 28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाले सामान पर भी टैक्स कम करने का निर्णय काउंसिल लेगी। डिप्टी सीएम ने इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने वालों को इसका पूरा फायदा ग्राहकों को देने की नसीहत दी। इस मामले में कई एफएमसीजी कंपनियों को नोटिस जा चुकवा है।  

क्रेडाई की मांग : क्रेडाइ नेशनल के अध्यक्ष जक्षय शाह ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र को जीएसटी से न्याय नहीं मिला है। इस कारण परेशानी है। स्टांप ड्यूटी 3 से 4 फीसदी करने एवं लेबर सेस देने में राहत मिलनी चाहिए। सर्कल रेट (एमवीआर) की हर साल समीक्षा होनी चाहिए। टाउनशिप पर भी जोर दिया। क्रेडाइ बिहार के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने बेहतर निर्माण क्वालिटी पर जोर दिया। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र इसे बताया। 

मंत्री सुरेश शर्मा एवं विजय सिन्हा तथा प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने भी अपने विचारों को रखा। इस अवसर पर कई राज्यों से आये क्रेडाइ के सदस्य, बिहार से एनके ठाकुर एवं भवेश समेत कई गण्यमान्य लोग मौजूद थे।     


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