मुख्य समाचार

रेरा में संशोधन कर नियामकों के अधिकार बढ़ाये जायें 

नई दिल्ली/एजेंसी। हरियाणा और मध्य प्रदेश के रीयल एस्टेट नियामकों ने कहा है कि रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) विधेयक यानी रेरा एक परिपूर्ण कानून नहीं है। इसे ठीक ढंग से नहीं लिखा गया है। इन नियामकों ने कहा कि रेरा कानून में संशोधन की जरूरत है ताकि उन्हें आदेशों के क्रियान्वयन के लिए अधिक अधिकार मिल सके। 

नियामकों ने कहा कि रेरा के तहत पहले रीयल एस्टेट नियामकों को रुकी पड़ी परियोजनाओं का समाधान ढूंढने के लिए छह महीने का समय देना चाहिए और उसके बाद दिवाला प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। 

आरआईसीएस रीयल एस्टेट सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश रेरा के चेयरमैन एंथनी डे सा ने कहा कि रेरा परिपूर्ण कानून नहीं है और इसमें संशोधन करने की जरूरत है। यह कानून 2016 में पारित और मई 2017 से लागू हुआ था। 

हरियाणा रेरा (गुरुग्राम) के चेयरमैन के के खंडेलवाल ने कहा कि यह एक खराब तरीके से लिखा गया कानून है, जिसमें कई खामियां हैं। इसमें शिकायत से निपटारे के लिए अधिकार को लेकर भी दोहराव है। 

एंथनी ने कहा कि रेरा को यदि और अधिकार नहीं दिये गये, तो यह अपनी विश्वसनीयता गंवा देगा। एमपी के नियामक ने कहा कि रेरा के मामले दीवानी अदालत में नहीं जा सकते हैं, लेकिन अन्य उपभोक्ता मंचों को लेकर यह कानून कुछ नहीं कहता। इस वजह से लगातार उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर इन मंचों के पास आते हैं। एंथनी ने कहा कि घर खरीदार की शिकायतों का एकमात्र मंच रेरा होना चाहिए।
 


संबंधित खबरें