मुंबई/एजेंसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक जमीन जायदाद के विकास से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिये काम कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व में घोषित विभिन्न क्षेत्रों के लिये प्रोत्साहन उपायों में रियलिटी क्षेत्र अछूता रह गया था। इस क्षेत्र का असर खासकर बुनियादी उद्योगों पर पड़ता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सिल्वर जुबली कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा जहां जरूरी होगा, वहां नियमों में बदलाव लाकर मदद दी जा रही है।
इसमें कंपनी कर घटाकर 22 प्रतिशत किया जाना शामिल है। इसके जरिये कंपनियों को 1.3 लाख करोड़ रुपये के बराबर कर राहत दी गयी। उन्होंने स्वीकार किया कि बाजार और खपत मांग बढ़ाने के लिये अगस्त से अब तक घोषित विभिन्न प्रोत्साहन उपायों से रियल एस्टेट क्षेत्र को पटरी पर लाने में मदद नहीं मिली है।
इसके लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। एक क्षेत्र जिसे मैंने छुआ नहीं, लेकिन इसका सकारात्मक प्रभाव होता है तथा शेयर बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है। वह है रियलिटी क्षेत्र। सीतारमण ने कहा कि कई निवेश कोष हमसे संपर्क कर कह चुके हैं कि वे इस क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार है, लेकिन वे कुछ नीति समर्थन चाहते हैं।
माना जाता है कि रियलिटी क्षेत्र में कालाधन का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा था, जिससे इसमें तेजी थी। नवंबर 2016 में नोटबंदी, मई 2017 में रेरा और जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने से रियलिटी क्षेत्र पर असर पड़ा है। एनबीएफसी कंपनियों में नकदी संकट का भी क्षेत्र पर असर पड़ा है।