मुंबई/नई दिल्ली। आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती नहीं करने के फैसले पर रियल एस्टेट कंपनियों ने निराशा जताई है। कंपनियों का कहना है कि घरों की बिक्री और आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय बैंक को रेपो दर में एक प्रतिशत की और कटौती करनी चाहिए।
वर्तमान में रेपो रेट 5.15 प्रतिशत, रिवर्स रेपो रेट 4.9, बैक रेट 5.40 एवं सीआरआर 4 प्रतिशत पर है। इससे पहले आरबीआई ने अक्टूबर 2019 में मौद्रिक समीक्षा की थी।
नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि उद्योग जगत रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती की उम्मीद कर रहा है। हम चाहते थे कि चैथाई-चैथाई प्रतिशत की छोटी-छोटी कटौतियों के बजाय एक बार में ही एक प्रतिशत की बड़ी कटौती हो। इससे सरकार के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलता और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने में मदद मिलती।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल ने बताया कि आरअीआई का ब्याज दरों में कटौती नहीं करने का फैसला हैरान करने वाला है। इससे उद्योग में निराशा है। ब्याज दरों में कटौती से ऋण की मांग बढ़ती और अर्थव्यवस्था को अधिक निवेश मिलता।
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र की दृष्टि से दरों में कटौती हमेशा स्वागतयोग्य है। यदि नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती होती, तो आवास ऋण की दर पहली बार घटकर आठ प्रतिशत से नीचे आ जाती।
टाटा रियल्टी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के एमडी संजय दत्त का कहना है कि इस बार आरबीआई का पूरा फोकस अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने पर था, लेकिन नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होने से हम निराश हैं।
सीबीआरई के चेयरमैन सी सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा कि रेपो दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार का ध्यान वृद्धि और मुद्रास्फीति के आयाम पर है। जेएलएल इंडिया के सीईओ एवं कंट्री प्रमुख रमेश नायर ने बताया कि नीतिगत दरों में बदलाव नहीं होना दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक इस बात को समझ चुका है कि आज जरूरत आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा कायम करने का है।