पटना। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकार राज्य में फ्लाई ऐश ईंट उद्योग को प्रोत्साहित करेगी। एनटीपीसी से फ्लाई ऐश मिलने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार से बात की जाएगी। डिप्टी सीएम राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के तत्वावधान में फ्लाई ऐश ईंट निर्माताओं की वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे थे। फ्लाई ऐश ईंट निर्माताओं ने बताया कि एनटीपीसी से फ्लाई ऐश मिलने में कठिनाई होती है। इसके परिवहन के लिए सब्सिडी की मांग भी राज्य सरकार से की।
डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य में परंपरागत तौर पर संचालित 6,600 ईंट भट्टों से प्रति वर्ष दो करोड़ ईंट का निर्माण होता है। इसके लिए प्राकृतिक संपदा मिट्टी की 55 मिलियन टन ऊपरी सतह का उपयोग किया जाता है। इन ईंट भट्टों से प्रतिवर्ष सर्वाधिक 16 मिलियन टन कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।
राज्य सरकार की पहल के बाद 3,500 परंपरागत ईंट भट्टों को स्वच्छतर तकनीक में बदला जा चुका है। फ्लाई ऐश ईंट उद्योग को प्रोत्साहित करने का नतीजा है कि 2012 में जहां राज्य में मात्र एक फ्लाई ऐश ईंट उद्योग था, वहीं अब इसकी संख्या बढ़कर 210 हो गई है। लाल ईंट की तुलना में फ्लाई ऐश ईंट की कीमत भी कम है। इसके गुणवत्ता प्रमाणीकरण के लिए भी सरकार पहल करेगी।
भवन निर्माण विभाग अपने भवनों के निर्माण में 50 प्रतिशत फ्लाई ऐश ईंट का प्रयोग कर रहा है। आने वाले दिनों में शत-प्रतिशत फ्लाई ऐश ईंट का उपयोग करने का सरकार निर्देश देगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सुझाव दिया कि पावर स्टेशन की 50 किमी की परिधि में परंपरागत लाल ईंट के निर्माण पर रोक लगाई जाए।