पटना में राष्ट्रीय कर सम्मेलन (National Tax Conference) के दूसरे दिन सीए गिरीश आहूजा ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 एवं इनकम टैक्स एक्ट 2025 की तुलनात्मक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए एक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। यह 1961 एक्ट के अनुकूल है। नए एक्ट को पहले से सरल किया गया है। गिरीश आहूजा ने कैपिटल गेन और री असेसमेंट पर विशेष जोर दिया।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय कर सम्मेलन (17 और 18 जनवरी) का आयोजन हुआ।

सीए आरएस कालरा ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 एवं इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत अनुमानित कर निर्धारण पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने Presumptive Income पर टैक्स कंप्यूटेशन में हुए बदलाव पर प्रकाश डाला। सीए सुनील अग्रवाल ने जीएसटी के तहत डिस्काउंट और इंसेंटिव पर जानकारी दी।
ब्रेन ट्रस्ट सेशन में ट्रस्टी के रूप में वरीय अधिवक्ता अजय कुमार रस्तोगी, डीवी पैथी, सीए राजेश मेहता, अधिवक्ता डीबी गुप्ता और सीए ललित कुमार केजरीवाल ने भाग लिया। अधिवक्ता संजीव कुमार अनवर और सीए राजेश खेतान मॉडरेटर में रहे।

बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सह कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन पीके अग्रवाल ने राष्ट्रीय कर सम्मेलन की सफलता पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 21 वर्षों के बाद यह राष्ट्रीय कर सम्मेलन हुआ। दोनों दिन चार-चार सेशन हुए।
सम्मेलन का पहला उद्देश्य कर अधिवक्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी को कर प्रणाली की अद्यतन जानकारी देना था। दूसरा उद्देश्य बड़े कर विशेषज्ञ सम्मेलन में आए विचारों को सरकार के समक्ष रखते हैं। सुझावों पर सरकार काम करती है और कर-प्रणाली में सुधार होता है।