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बिहार की चावल मंडियों में धड़ल्ले से हो रही जीएसटी की चोरी 

चावल कारोबारियों ने जीएसटी चोरी के साथ उपभोक्ताओं को चूना लगाने का नया तरीका खोजा है। चावल की बोरी पर 26 किलोग्राम अंकित है, लेकिन वास्तविक चावल 25 किलोग्राम है। ब्रांडेड कंपनियों के चावल में ऐसी शिकायत नहीं है।

26 किलोग्राम और उससे अधिक वजन के चावल, आटा और दाल पर जीएसटी शून्य है जबकि 25 किलोग्राम तक के पैक पर पांच प्रतिशत जीएसटी है। 

जुलाई 2022 से लागू टैक्स की इस व्यवस्था का चावल कारोबारी जमकर फायदा उठा रहे हैं। जहां एक ओर वे जीएसटी देने से बच रहे हैं, वहीं उपभोक्ताओं को 26 किलोग्राम की जगह 25 किलो ही चावल मिल रहा है।    

व्यापारियों ने ऐसे ब्रांड को चुना है, जिसकी जिम्मेदारी किसी पर न हो। बिहार में क्षे़त्र के अनुसार ब्रांड का नाम बदल जाता है। इसके लिए वे संबंधित क्षेत्र के लोकप्रिय ब्रांड का इस्तेमाल करते हैं ताकि माल की खपत आसानी से हो जाए।   

पटना के बाजार में 7 स्टार ब्रांड नाम से चावल सभी थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के यहां आकर्षक पैकिंग में उपलब्ध है। हर मंडी में 7 स्टार चावल की बोरी पर अलग-अलग मिलर का नाम और कस्टमर केयर नंबर आपको दिखेगा। 

चावल की गुणवत्ता और वजन की शिकायत जब आप कस्टमर केयर नंबर पर करेंगे। आपको जवाब मिलेगा। यह मेरा ब्रांड नहीं है। किसी ने मेरे ब्रांड की नकल कर ली है। 

यह पूछे जाने पर कि कोई आपके ब्रांड की नकल कर रहा है, तो आप कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं ? इस पर मिलर कहते हैं। यह संभव नहीं है। 

एक उपभोक्ता रमेश चौधरी ने नालंदा जिला के पटेल एग्री इंडस्ट्रीज निर्मित 7 स्टार ब्रांड चावल पटना के बाजार से खरीदा। वजन 26 किलाग्राम की जगह 25 किलो होने की शिकायत उन्होंने बोरी पर अंकित मोबाइल नंबर 9065518843, 9097869168, 9771872699 पर की। अन्य मिलर की तरह उनका भी वैसा ही जवाब था। 

नाम नहीं लिखने की शर्त पर कई व्यापारियों ने बताया कि बाजार में उपलब्ध अधिकतर स्टॉक बोरी पर अंकित मिलर का ही है। वे बचाव के लिए इस तरह का बयान देते हैं। 

कुछ ने कहा, अनाज पर जीएसटी एक प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। सभी पैकिंग पर एक समान जीएसटी होने से टैक्स की चोरी कम होगी।  

एक-दो कारोबारियों ने बताया कि पैकिंग के बाद चावल सूखने से भी वजन कम हो जाता है। सवाल यह है कि सूखने के बाद चावल का वजन 25 किलोग्राम ही मिलता है। यह कम या अधिक भी हो सकता है।   

ऐसी स्थिति में उपभोक्ता क्या करे ? इसके समाधान के लिए जीएसटी और मापतौल विभाग को सक्रिय होकर काम करना होगा।  
 


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