नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सेंट्रल बोर्ड ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर की सिफारिश कर दी है। ईपीएफ अंशधारकों को 2019-20 की तरह ही 8.50 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। इस तरह कम ब्याज मिलने की अटकलों पर विराम लग गया। कोविड-19 संकट के कारण चालू वर्ष 2020-21 में बड़ी संख्या में अंशधारकों ने जमा राशि निकाली है। देश में ईपीएफ के पांच करोड़ से अधिक सदस्य हैं।
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में हुई सेंट्रल बोर्ड की बैठक में ब्याज दर की घोषणा की गई। श्रम और रोजगार राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सचिव अपूर्व चंद्रा एवं केंद्रीय भविष्यनिधि आयुक्त सुनील बर्थवाल भी मौजूद थे।
ईपीएफओ पिछले दस वर्षों से सदस्यों के अंशदान पर आठ प्रतिशत से अधिक ब्याज दे रहा है। यह ब्याज दर अन्य निवेश योजनाओं की तुलना में अधिक है। अंशधारकों को आयकर छूट के साथ भविष्यनिधि, पेंशन एवं बीमा योजनाओं के रूप में मजबूत सामाजिक सुरक्षा मिलती है।
ईपीएफओ ने पिछले दस वर्षों में 2015-16 में सर्वाधिक 8.8 प्रतिशत का ब्याज दिया है। ईपीएफओ का सर्वाधिक जोर आकर्षक ब्याज के साथ मूलधन की सुरक्षा पर है। 2015-16 की अवधि के दौरान ईपीएफओ ने एक्सचेंज ट्रेड फंड के माध्यम से इक्विटी में निवेश शुरू किया। इस दौरान इक्विटी में पांच प्रतिशत निवेश किया गया। बाद में यह 15 प्रतिशत तक हो गया।